Showing posts with label #आत्म-निर्भर-भारत #जननी-जन्मभूमि. Show all posts
Showing posts with label #आत्म-निर्भर-भारत #जननी-जन्मभूमि. Show all posts

भविष्य के भारत में अधिकारों की लड़ाई की समाप्ति की कल्पना के साथ।

 By Priya Mishra in HindiSociety

एक विकासशील देश है तथा इसे विकसित बनाने हेतु सरकार तेज़ी से कार्यरत है। जहां एक ओर आज भारत में तकनीकी बढ़ाने, डिजिटल बनाने और देश की इकॉनोमी को 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर बनाने का उद्देश्य है। वहीं एक सवाल हर भारतीय के मन में होगा कि उसे अपना भविष्य का भारत कैसा देखना है?

मेरे विचार से मेरे भविष्य के भारत का सपना बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। किंतु यदि हम सभी मिलकर प्रयास करें, तो इसे साकार किया जा सकता है।

आज भारत को विकसित देशों में शामिल करने हेतु तेज़ी से प्रयास किये जा रहे हैं। डिजिटल इंडिया तथा मेक इन इंडिया के तहत अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने व रोज़गार पैदा करने के प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन, वहीं कुछ ऐसी बातें भी हैं, जिनका सीधा असर हमारे रहन-सहन के सुधार को लेकर है। विश्वगुरु बनने की राह पर अग्रसर अपना भारत कैसा होना चाहिए इस पर कुछ निम्न बातें महत्वपूर्ण हैं।

रूढ़िवादी मान्यताओं का अंत

तरक्की की ओर कदम बढ़ाते अपने देश में कुछ जगहों पर पुरानी प्रथाओं के नाम पर कई ऐसी रूढ़िवादी मान्यताएं हैं, जिन्हें बदलना आवश्यक है। जैसे, उदाहरण के लिए यदि देखा जाए तो छुआछूत की प्रथा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ये प्रथाएं बड़े शहरों में भले ही देखने को ना मिलती हों लेकिन मध्यप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ जैसे इलाकों में आज भी ये वैसी ही चलती हुई दिखाई देंगी।

मैंने बचपन से इस प्रथा को खुद के घर में भी अपनाते हुए देखा है। इसी तरह की अन्य कई ऐसी रूढ़िवादी मान्यताएं हैं जो अपने भविष्य के देश में समाप्त होनी चाहिए। ताकि इन विचारधाराओं का असर आने वाली पीढ़ी पर ना हो सके और इसके कारण किसी को हीनभावना का शिकार ना होना पड़े।

लिंगभेद की समाप्ति

देश में कई स्थान ऐसे हैं जहां लिंग के आधार पर भेदभाव किया जाता है। एक सर्वे के अनुसार लड़कियों की संख्या सरकारी स्कूलो में और लड़कों की संख्या प्राइवेट स्कूलों में सर्वाधिक पाई गई। जिसका सीधा सा यही मतलब है कि आज भी लड़कियों पर लड़कों की अपेक्षा कम खर्च करने की मान्यता व्याप्त है।

इसके अलावा महिलाओं को अक्सर पुरुषों की तुलना में कमज़ोर समझा जाता है, जिसकी वजह से अधिकतर महिलाये स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पातीं। इसके अलावा छोटे प्रदेशों में इसी भेदभाव के कारण महिलाओं पर अत्याचार होते रहे हैं, जिसमें दहेज़ प्रताड़ना, घरेलू हिंसा इत्यादि बातें शामिल हैं।

इसके अलावा अधिकतर महिलाएं इन अत्याचारों को अपना कर्म मानते हुए सहती रहती हैं तथा बदनामी के डर से चुप रह जाती है। समाज को नए आयामों तक ले जाने हेतु लिंगभेद की समाप्ति की जानी चाहिए।

महिलाओं के अलावा एक अन्य समाज भी हैं, जो संघर्षों की लड़ाई में लगातार जूझता रहा है। हमारा समाज जिन्हें किन्नरों के नाम से जानता है, समाज में उनका भी स्थान है। लिंग के आधार पर उनसे भेदभाव के कारण उन्हें समाज से अलग कर दिया जाता है, जिसकी वजह से वे मांग कर खाने को मजबूर होते है।

इस लिंग में जन्म लेने वाले बच्चे को उसी के माता पिता द्वारा त्याग दिया जाता है और अकेले लड़ने को छोड़ दिया जाता है। भले ही अब धीरे-धीरे हम इस सोच से आगे बढ़ रहे हों लेकिन अपने भविष्य के भारत में मैं इन भेदभावों को पूर्णतः खत्म होता हुआ देखना चाहती हूं, ताकि हमारे समाज का ये वर्ग भी सामान्य नज़रों से देखा जा सके और इन्हें भी बराबरी का हक मिले।

जातिवाद की समाप्ति

जाति के आधार पर कट्टरता को समाप्त कर कर्मों के आधार पर व्यक्ति मूल्यांकन किया जाना चाहिए। जाति आधारित बंटवारे के कारण आज हम सभी एक होकर भी अलग-अलग वर्ग और समाज में बंटे हुए हैं, जिसका असर लड़ाई दंगों के रूप में देखना पड़ता है।

जातिवाद की समाप्ति के साथ ही ऊंच-नीच, इत्यादि के कारण होने वाली लड़ाई समाप्त होने के बाद ही भाईचारे की शुरुआत होगी।

शिक्षा का विकास व रोज़गार

शिक्षा का स्तर किताबी ज्ञान ना होकर व्यवहारिक होना चाहिए। हर बच्चे को उसकी रूचि के अनुसार ज्ञान मिलना चाहिए ताकि वे एक क्षेत्र में बेहतर होते हुए नवीन भारत को नई दिशा प्रदान कर सके।

गरीबी मुक्त भारत

काम छोटा हो या बड़ा, अपने सामर्थ्य के अनुसार हर व्यक्ति कार्यशील हो तथा गरीबी के कारण कोई भी संसाधनों से वंचित ना रह जाए तथा अमीरी गरीबी के मायाजाल से समाज का छुटकारा हो सके।

भ्र्ष्टाचार मुक्त भारत

भारत को एक भ्र्ष्टाचार मुक्त देश बनाया जाना चाहिए, जिसके लिए आवश्यक है कि हम स्वयं से शुरुआत करें और भ्रष्टाचार मुक्त भारत की कल्पना करें।

India flag people FB

अधिकारों की लड़ाई समाप्त हो और कर्तव्यों का निर्वहन हो

सर्वाधिक महत्वपूर्ण एक विचार यह है कि हमारे अपने भारत से अधिकारों की लड़ाई की समाप्ति होनी चाहिए और समाज को कर्तव्यों के निर्वहन पर ज़ोर देना चाहिए। हम सभी को सिखाया गया है कि अपने अधिकारों के लिए लड़ो, परंतु इसके साथ ही यदि कर्तव्यों के निर्वहन पर भी ज़ोर दिया जाए और कर्तव्यों की शिक्षा दी जाए तो हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए कार्य करेगा और अधिकारों की लड़ाई स्वतः ही समाप्त हो जायेगी।

इन सभी बातों के अलावा देश प्रदूषण मुक्त, सिंगापुर जैसे स्वच्छ्तापूर्ण और रोगमुक्त हो। इन सभी बातों के साथ अपने संस्कार और संस्कृति से विश्वविख्यात हो ऐसे भारत की कल्पना करती हूं।

रिश्ता इंसानियत का।

स्वतंत्रता दिवस के रोज़ पास वाले स्कूल में फूहड़ गाने बज रहे थे

By Priya Mishra  in  Hindi ,  Society “गणतंत्र दिवस के रोज़ पास वाले स्कूल में फूहड़ गाने बज रहे थे” स्वतंत्रता दिवस के रोज़ अपने घर पर बैठे...